
Breaking Breads with Russians wearing WWII cap!, Gulzar saab in Moscow
इनके गायन के बाद वो पल आया, जिसके लिये ये महफ़िल सजाई गई। कार्यक्रम का संचालन कर रहे चौपाल के "एंकर" अतुल तिवारी ने गुलज़ार साब को सम्मानित करने के लिये मंच पे आमंत्रित किया पुष्पा भारती जी (स्व. धर्मवीर भारती की पत्नी) को । पुष्पा जी ने गुलज़ार साब को ट्रॉफ़ी प्रदान कर सम्मानित किया और चौपाल के इतिहास में एक यादगार पल की प्रविष्टी कर दी ।
और बारी आई गुलज़ार साब के काव्य-पाठ की, और अगले एक घंटे तक अपनी नज़्मों की बौछार से गुलज़ार साब ने श्रोताओं को सराबोर कर दिया। एक के बाद एक नज़्मों की बौछार चली जिनमें "खुदा", "कितनी गिरहें", "पूरे का पूरा आकाश", "चिपचिपे दूध से नहलाते", और "सिद्दार्थ" शामिल थी।
ज़रा पैलेट सम्भालो रंगोबू का
मैं कैनवास आसमां का खोलता हूं
बनाओ फिर से सूरत आदमी की!
जहां नुमा एक होटल है नां...
जहां नुमा के पीछे एक टी.वी. टॉवर है नां...
चाँद को उसके ऊपर चढ़ते देखा था कल!
होली का दिन था
मुंह पर सारे रंग लगे थे
थोड़ी देर में ऊपर चढ़ के
टांग पे टांग जमा के ऐसे बैठ गया था,
होली की खबरों में लोग उसे भी जैसे
अब टी.वी. पर देख रहे होंगे!!

दोस्तो, साथियों और देशवासियों,
आप सबको नया साल मुबारक़ गये साल को अलविदा , नये साल को ख़ुशामदीद, वैलकम
आप सबको मुबारक़...
पिछले साल में ये ज़रूर हुआ कि कुछ खेलकूद में, कुछ छीनाझपटी में, कुछ लड़ाई-झगड़े में कहीं कहीं से
उसकी पोशाक़ फट गयी.. कहीं कहीं से सीवन उधड़ गयी.. लेकिन हर बार पुराना लिबास तो उतारना पड़ता है,
पुराना साल निकालना पड़ता है और नया साल पहनना पड़ता है.
इस साल फिर हमेशा की तरह ये दुआ ज़रूर करते हैं कि आपका साल सुख, शान्ति, चैन और सुकूं के साथ गुज़रे..
कोशिश यही करेंगे कि इस साल भी आपकी कहीं से ज़ेब ना फटे, कहीं से दामन ना उधड़े, कहीं से सीवन ना जाये और
ये 365 दिन आने वाले तरक्की के साथ गुज़रें.. आप तरक्की करते रहें आगे सब बढ़ते रहें..
उत्साह और उम्मीद की ये हालत है हर हिन्दुस्तानी की उसकी निगाह चांद पर है.. बल्कि ये कहना चाहिये कि एक क़दम चांद पर है और निगाह उससे आगे.. आप सब को चांद पे ये चढाई, ये फ़तेह मुबारक़ हो, और नया साल फिर से
मुबारक़!
जब जब पतझड़ में पेड़ों से पीले पीले पत्ते मेरे लान मे आकर गिरते हैं
रात में छत पर जाकर मैं आकाश को तकता रहता हूं
लगता है एक कमज़ोर सा पीला चांद भी शायद
पीपल के सूखे पत्ते सा लहराता लहराता मेरे लान में आकर उतरेगा
गर्मी से कल रात अचानक आंख खुली तो
जी चाहा कि स्विमिंग पूल के ठंडे पानी में एक डुबकी मार के आऊं
बाहर आके स्विमिंग पूल पे देखा तो हैरान हुआ
जाने कब से से बिन पूछे इक चांद आय और मेरे पूल मे लेटा था और तैर रहा था
उफ़्फ़ कल रात बहुत गर्मी थी
एक नज़्म मेरी चोरी कर ली कल रात किसी ने
यहीं पड़ी थी बालकनी में
गोल तिपाही के ऊपर थी
व्हिस्की वाले ग्लास के नीचे रखी थी
नज़्म के हल्के हल्के सिप मैं
घोल रहा था होठों में
शायद कोई फोन आया था
अन्दर जाकर लौटा तो फिर नज़्म वहां से गायब थी
अब्र के ऊपर नीचे देखा
सूट शफ़क़ की ज़ेब टटोली
झांक के देखा पार उफ़क़ के
कहीं नज़र ना आयी वो नज़्म मुझे
आधी रात आवाज़ सुनी तो उठ के देखा
टांग पे टांग रख के आकाश में
चांद तरन्नुम में पढ़ पढ़ के
दुनिया भर को अपनी कह के
नज़्म सुनाने बैठा था